मनु पंवार (वैसे तो अपन चीज़ों को ज़्यादा सीरियसली लेने वाले बंदे नहीं हैं. हमेशा हंसने, खिलखिलाने पर यकीन रखते हैं, मगर आज व्यंग्य नहीं....
बी.मोहन नेगी: उनके हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं बी.मोहन नेगी: उनके हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं Reviewed by Manu Panwar on October 26, 2017 Rating: 5
(जब दिल्ली की तपिश दम निकाल रही हो, तब अपना गांव ज़्यादा याद आता है. कई बार तस्वीरों से ही काम चलाना पड़ता है. लेकिन इन्हें शायद ज़्यादा...
गनीमत है कि गांव है गनीमत है कि गांव है Reviewed by Manu Panwar on November 02, 2016 Rating: 5