दामाद पर एक निबंध

मनु पंवार
ईडी के सामने पेशी से पहले वाड्रा का इंस्टाग्राम पोस्ट      साभार : वाड्रा के इंस्टाग्राम अकाउंट से
हमारे देश में प्राय: दो प्रकार के दामाद पाए जाते हैं। पहला निजी दामाद यानी पारिवारिक और दूसरा सरकारी दामाद। वैसे कई दामाद घर जमाई भी होते हैं। दामाद को घर में सम्मानपूर्वक 'जमाई राजा' कहकर भी पुकारा जाता है। इसी वजह से अक्सर जमाई खुद को 'राजा' समझने लगता है और अपनी राजशाही के चक्कर में ससुरालियों का बंटाधार कर डालता है। सरकारी दामाद भी जमाई राजा टाइप ही होते हैं, लेकिन आधुनिक भारत का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि दामाद ससुरालियों के साथ-साथ पार्टी का भी बंटाधार कर डालते हैं।
पार्टीवालों की  मजबूरी होती है कि उन्हें सरकारी दामाद की खिदमत में जुटना पड़ता है। कई बार खिदमत इतनी बेहिसाब हो जाती है कि दामाद बेचारा छोटी-मोटी गलती कर बैठता है। उसकी छोटी-मोटी गलती को मीडिया वाले बड़ा बना डालते हैं। हिन्दी में ऐसी परिस्थितियों पर मुहावरे भी प्रचलित हैं, तिल का ताड़ बना डालना या बात का बतंगड़ बना देना। 

कांग्रेस मुख्यालय में 5 फरवरी को प्रियंका गांधी वाड्रा की नेमप्लेट लगाई गई       फोटो सौजन्य: ANI
सरकारी दामादों के अलिखित अधिकार ज्य़ादा होते हैं, लेकिन उनके कर्तव्यों का कहीं कोई उल्लेख नहीं मिलता है। चूंकि दामादों के कर्तव्यों पर संविधान खामोश है, इसलिए सरकारी दामादों के पास कामधंधा नहीं होता। जब 'काम' नहीं होता तो दामाद अपना 'धंधा' शुरू कर देते हैं। नादान लोग लांछन लगाने लगते हैं कि दामाद धंधे में उतर गया। जबकि वो नादान ये नहीं जानते कि धंधा करना दामाद की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि अपना खाली वक़्त गुजारने अर्थात् बोरियत दूर करने के लिए दामाद को ऐसा करना पड़ता है। दामाद का बोर होना सरकारों के लिए शुभ संकेत नहीं माना जाता। इसीलिए दामाद सत्ता द्वारा प्रदत्त अदृश्य शक्तियों का भरपूर उपयोग कर रहा होता है। सरकारी दामाद होने के नाते यह उसका हक‍़ भी बनता है।

दामाद की राजनीतिक ज़मीन बहुत मजबूत होती है, इसलिए जमीन की ख़रीद-फरोख़्त का धंधा उसे ज्यादा सूट करता है। वह ज़मीनों की डील पे डील करता जाता है और एक दिन दामाद रियल एस्टेट का बड़ा डीलर बन जाता है। दामाद कब डीलर में बदल जाता है,इसका आभास न ससुरालियों को होता है और न ही सरकार को। अपने इस नए अवतार में दामाद इस कदर घुल-मिल जाता है कि कभी-कभी तो यह पता ही नहीं चलता कि डीलर कौन है और दामाद कौन?

दामाद पर एक निबंध दामाद पर एक निबंध Reviewed by Manu Panwar on February 06, 2019 Rating: 5

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