कहीं वाड्रा मुफ्त ज़मीन बांटने की घोषणा न कर दें !

मनु पंवार

हमने पहले ही आगाह किया था. वसंत ऋतु में मन बौरा जाता है. ऐसे में वसंत में चुनावी घोषणा के साइड इफेक्ट्स अवश्यंभावी हैं. अब तो इसके रुझान दिखने भी लगें है. राजनीतिक दलों की तरफ से एक से एक लुभावने ऑफर शुरू हो गए हैं. कुछ-कुछ वैसे ही जैसे जाते हुए मौसम में शॉपिंग मॉल्स में आप अक्सर कपड़ों पर स्पेशल ऑफर देखते होंगे.
चुनावी सीजन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ग़रीबों के लिए 72 हज़ार रुपये सालाना की न्यूनतम आमदनी का ऐलान कर दिया. वो भी तब जबकि पब्लिक के 15-15 लाख रुपये अभी मोदीजी पर ड्यू हैं. वो बहुप्रतीक्षित पंद्रह लाख रुपये अभी तक अकाउंट में पहुंचे नहीं है. हमारी तो सरकार बहादुर से गुजारिश है कि कृपया उन पंद्रह लाख रुपये में से ये नए 72 हज़ार रुपये काटकर बकाया पैसा हमें दे दें. वो भी 23 मई से पहले-पहले. चुनाव के कौन याद रखता है.


चुनावी मौसम में लोक लुभावन घोषणाओं का दौर चल ही रहा है. मुझे तो अंदेशा है कि राहुल गांधी की तर्ज पर जोश-जोश में कहीं रॉबर्ट वाड्रा भी ये घोषणा न कर दें कि ग़रीबों के लिए 50-50 गज़ ज़मीन मेरी तरफ़ से फ्री. क्या भरोसा ! मौसम ही ऐसा चल रहा है. कुछ भी हो सकता है जी.

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पता नहीं किसी को याद हो न हो. दो साल पहले यानी 2017 में जेटली साहब ने हिमाचल प्रदेश विधानसभआ चुनाव के लिए बीजेपी का विज़न डॉक्यूमेंट जारी किया था. उसमें बीजेपी ने हिमाचल के युवाओँ को 1 जीबी इंटरनेट डेटा फ्री देने का वादा किया था. वो भी ऐसे दौर में जबकि रिलायंस, वोडाफोन और एयरटेल वाले 2जीबी डेटा पहले से ही फ्री दे रहे थे. चुनाव जो न कराए.

प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके पूछा, क्या आपने टीशर्ट ऑर्डर कर दी?
ऐसे दिलचस्प और लोक लुभावन ऑफरों के सीज़न में मुझे एक बात पर हैरानी हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्विटर पर टी-शर्ट बेचने लगे. उस टी-शर्ट में मोदीजी के इलेक्शन कैंपेन का नारा 'मैं भी चौकीदार' लिखा है. भई, एक तो रोज़गार देने के बजाय आपने सब बंदों को 'चौकीदार' बना दिया और ऊपर से टी-शर्ट भी मुफ्त में नहीं दे रहे हो ! यह तो ज्यादती है जी.

कहीं वाड्रा मुफ्त ज़मीन बांटने की घोषणा न कर दें ! कहीं वाड्रा मुफ्त ज़मीन बांटने की घोषणा न कर दें ! Reviewed by Manu Panwar on March 26, 2019 Rating: 5

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