वसंत ऋतु में चुनाव के साइड इफेक्ट
मनु पंवार
इस बार वसंत चुनावी सीजन में आया है. या ये भी कह सकते हैं कि चुनाव वसंत में आया. वसंत तो ऋतुओं का राजा है. उसको भला किसी से पूछने या बताने की जरूरत थोड़े ही है कि वह कब आए. वह तो आ जाता है. उधर, दिल्ली में बैठे चुनाव आयोग ने भी गजब का मुहूर्त निकाला. एक तरफ फागुन, दूसरी तरफ चुनावी मौसम. एक ओर जमकर रंग बरस रहे हैं, दूसरी तरफ चुनावों में न जाने कितनों के चेहरे लाल-पीले हुए पड़े हैं. चुनाव के बाद कई दलों का रंग उतरना तय है. तो कइयों पर सत्ता का रंग भी चढ़ेगा.
बहरहाल यह वसंत ऋतु है. शीतकाल में जो प्रेम कहानियां सर्दी के मारे रजाइयों और कंबलों के भीतर सिकुड़ी हुई थीं, वो इस मौसम में अंगड़ाइयां लेने लगती हैं. मौसम बदल रहा है. बाजारों में गरम कपड़ों पर भारी छूट की सेल लगी है. पहाड़ों और मैदानों के गांव-देहातों में सरसों के खिले फूल वसंत की दस्तक देते होंगे, यहां महानगरों में तो इस सीजन में दुकानों और शोरूमों में लटक रही सेल की तख्तियों से ही लोग वसंत का अंदाज़ा लगा लेते हैं.
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| महानगर का वसंत : नोएडा सेक्टर 60 की तस्वीर मेरे फोन से |
इस बार वसंत चुनावी सीजन में आया है. या ये भी कह सकते हैं कि चुनाव वसंत में आया. वसंत तो ऋतुओं का राजा है. उसको भला किसी से पूछने या बताने की जरूरत थोड़े ही है कि वह कब आए. वह तो आ जाता है. उधर, दिल्ली में बैठे चुनाव आयोग ने भी गजब का मुहूर्त निकाला. एक तरफ फागुन, दूसरी तरफ चुनावी मौसम. एक ओर जमकर रंग बरस रहे हैं, दूसरी तरफ चुनावों में न जाने कितनों के चेहरे लाल-पीले हुए पड़े हैं. चुनाव के बाद कई दलों का रंग उतरना तय है. तो कइयों पर सत्ता का रंग भी चढ़ेगा.
वसंत ऋतु में मन बौरा जाता है. इसीलिए वसंत में एक दफा 'चिकनी चमेली छिपके अकेली पव्वा चढ़ाके' आ गई. उससे पिछले वसंत में 'मुन्नी बदनाम' हो गई थी। यह बात अलग है कि उसके बाद 'शीला की जवानी' से लेकर 'जलेबी बाई' की मादक अदाओं पर पगलाए लोगों ने आहें भरीं. मुन्नी को बाद में किसी ने नहीं पूछा. इससे खिन्न होकर 'मुन्नी' भी जाने कब अपने मुन्ना के संग चुपचाप भग ली. आदर्श चुनाव आचार संहिता का भी ख्याल नहीं रखा. मुन्नी की बदनामी तब भी हुई.
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| साभार : दैनिक भास्कर में 21 मार्च को छपा कार्टून |
प्रेम की ऋतु भी दरअसल वसंत पर काफी हद तक डिपेंड है. नए जमाने की प्रेम कथाएं इस सीजन में ज्यादा बौरा जाती हैं. दिलों में रंग-बिरंगे फूल खिलने लगते हैं. नवोदित प्रेमियों के दिलों में गुदगुदी हो रही है. लेकिन नेताओं के दिलों में धुकधुकी हो रही है. यह उनकी परीक्षा का समय जो है. वसंत में बौराया वोटर न जाने ईवीएम का कौन-सा बटन दबा दे.
वसंत ऋतु में चुनाव के साइड इफेक्ट
Reviewed by Manu Panwar
on
March 21, 2019
Rating:
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March 21, 2019
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