उल्टा तीर छोड़ने की कला
मनु पंवार
(6)
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| मदुरई कै रैली में मोदीजी |
(1)
उल्टा तीर छोड़ने की कला
सवाल : "मोदीजी उल्टा तीर क्यों चला रे?"
जवाब : "इसलिए कि चल गया तो तीर वरना तुक्का !"
(2)
नेताजी अब कहां फटेंगे?
रोज़ टनों के हिसाब से बोलने वाले नेताओं को चुनाव आयोग की पाबंदी के बाद 72 घंटे चुप रहना पड़ेगा। ये तो फिर भी चल जायेगा, लेकिन सोचो कि ऐसा बन्दा जब 72 घंटे बाद बोलेगा तो अंदर से कितना भरा हुआ होगा।
(3)
इलेक्शन में नो भाई-बहन !
जया प्रदा बोलीं-मैंने आज़म को भाई बोला, उन्होंने मुझे ज़लील किया।
एक महिला नेता ने टीवी डिबेट में एक एंकर को बहनजी बोल दिया तो वो गुस्से से तमतमा गईं।
हे संजय ! ये कुरुक्षेत्र नें चल क्या रहा है बे ?
(4)
संकल्प से 'सिद्धि'
"सारी घोषणाएं 2014 में ही कर देने का एक फायदा तो है ही।"
"वो क्या?"
"इस बार का चुनाव तो उन घोषणाओं को पूरा करने के 'संकल्प' पर ही लड़ सकते हैं।"
"वो क्या?"
"इस बार का चुनाव तो उन घोषणाओं को पूरा करने के 'संकल्प' पर ही लड़ सकते हैं।"
(5)
चुनाव में लकड़ी की काठी
फिल्मी लोग राजनीति में भी आ जाएं, उनकी नज़र में पब्लिक 'मासूम' ही होती है। कांग्रेस के टिकट पर लड़ रही उर्मिला मातोंडकर को ही देख लो. वो पब्लिक के बीच 'लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा 'गाना गा रही हैं. बताइए !
बच्चे बड़े हो गए
जीमेल 15 साल का हो गया। आईपीएल 12 साल का हो गया। देखते ही देखते बच्चे कब बड़े हो जाते हैं, पता ही नहीं चलता।
(7)
हमारी रोजी छीन लोगे !
लालूजी ने जेल में किताब लिख डाली। आडवाणीजी ब्लॉग लिख रहे हैं। जेटली साहब ने भी 5 साल ब्लॉग लिखकर काट लिए। भई, हम अदने से लेखकों के लिए भी कुछ काम छोड़ दीजिए.
उल्टा तीर छोड़ने की कला
Reviewed by Manu Panwar
on
April 16, 2019
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