हिममानव से बड़े चरण तो हमारे चुनाव के हैं !
मनु पंवार
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| साभार : बीबीसी हिंदी पर कीर्तिश भट्ट का कार्टून उनके ट्विटर हैंडल से |
पब्लिक से वादा कुछ और आने का था लेकिन आ गया हिममानव यानी येती। बंदा आया भी तो बर्फ में चलके और पब्लिक को बिना कुछ दिए चुपचाप निकल भी लिया। पीछे छोड़ गया तो सिर्फ अपने कदमों के निशान। अब हम बर्फ पर उसके निशान का साइज नापने में लगे हैं कि उसके चरण कितने बड़े रहे होंगे। मुझे तो लगता है कि हिममानव से ज़्यादा बड़े चरण तो हमारे चुनाव के हैं। एक-दो नहीं, पूरे 7 चरण।
अब आप ही बताइए, जिसके चरण सात होंगे वो कितना विशालकाय होगा ! कोई हिममानव कहां टिक पाएगा उसके सामने। वैसे हमारी पब्लिक के साथ अक्सर ऐसे ही मासूम धोखे हो जाते हैं। आज से नहीं, जब से आज़ाद हुए तभी से। 'अच्छे दिन' आने से पहले बगदादी वापस आ गया। बगदादी की चर्चा हो ही रही थी कि येती ने भी एंट्री मार ली। कभी-कभी तो लगता है कि 'अच्छे दिन' अभिनेत्री राखी के उन करण-अर्जुन से भी गये-गुजरे निकले।
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| साभार : कार्टूनिस्ट चंदन का कार्टून |
पूरी फिल्म में वो दुखियारिन मां राखी कहती रह गई कि मेरे करण-अर्जुन अर्थात् अच्छे दिन आएंगे। लेकिन करण-अर्जुन आए फिल्म के आखिर में। गनीमत है कि फिल्म की उस दुखियारिन मां अर्थात् राखी के अच्छे आए तो सही। यहां तो बंदे पूरे पांच साल अच्छे दिन की टकटकी लगाए रहे और आखिर में आया भी कौन- हिममानव।
अब पब्लिक समझ नहीं पा रही है कि आखिर ऐसे टाइम पे येती आया क्यों? अब तो चौथे चरण का चुनाव भी निपट गया है। बस, 3 चरण ही बाकी रह गए हैं। वो क्या हवा का मिजाज भांपने आया होगा? मुझे तो शक हो रहा है कि हो न हो, वो हिममानव 'अच्छे दिन' का भेष धरके ही आया था? हो सकता है कि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने की वजह से उसने रुकने में दिलचस्पी न दिखाई हो और कदमों के निशान छोड़के लौट गया हो।
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| साभार : TOI के कार्टूनिस्ट संदीप अध्वार्यु का कार्टून उनके ट्विटर हैंडल से |
लेकिन सवाल तो फिर भी है। अगर हिममानव के भेष में अच्छे दिन आए भी थे तो किसी को कानों-कान ख़बर क्यों नहीं हुई? चुनाव के मौसम में तो उसका ढोल पीटा जाना चाहिए था। हमारी पब्लिक भी बड़ी ढीठ है। ऐसे नहीं मानेगी। इसीलिए शायद अब सारी कायनात उन अच्छे दिनों अर्थात् हिममानव को ढूंढने में लगी है।
हिममानव से बड़े चरण तो हमारे चुनाव के हैं !
Reviewed by Manu Panwar
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May 01, 2019
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